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दिवाली पूजा के लिए विशेष पूजा सामग्रियाँ उनका उपयोग और क्या लाभ होता है इसके बारे में जानिए

दिवाली के दिन हर कोई अपने घर में पूजा करता है अपने घर और परिवार के सुख शांति, समृद्धि, व्यापार वृद्धि के लिए, लेकिन यदि आप दिवाली के दिन कुछ विशेष पूजा वस्तुओ का प्रयोग करें जो की माता लक्ष्मी, देवी काली और भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय होती है तो आपको इसके विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।
 


विशेष लाभ का अर्थ है की न केवल आपके घर में धन, वैभव, सुख, समृद्धि, आएगी बल्कि इन सबसे जुडी हुई समस्याओं का भी निवारण होगा, इसके अलावा इन विशेष सामग्रियों का प्रयोग करने से अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं।


दिवाली पूजा के लिए विशेष पूजा सामग्रियाँ

विशेष पूजा सामग्रियाँ निम्नलिखित हैं
गोमती चक्र,
काली हल्दी,
लक्ष्मी कौड़ी,
लघु नारियल,
लाल गुंजा,
सफ़ेद गुंजा,
काली गुंजा,
सफ़ेद और पीली कौड़ियाँ,
कमल गट्टे के बीज,
काले घोड़े की नाल,
गोरोचन,
कामाख्या सिन्दूर,
हल्दी माला,
वैजन्ती माला,

इन पूजन वस्तुओ के प्रयोग करने से लाभ:

यदि आप इन वस्तुओ का प्रयोग धनतेरस, नरक चतुर्दशी या दिवाली पर करते हैं तो आपको निम्न लाभ प्राप्त होंगे:
धन से सम्बंधित सभी समस्याओं का निवारण होगा,
कर्ज से छुटकारा मिलेगा और कर्ज नहीं बढ़ेगा,
व्यापार में वृद्धि होगी और सदैव उन्नति के मार्ग पर होगा,
रिलेशनशिप की समस्या समाप्त होगी और विश्वसनीयता बढ़ेगी,
हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी और रुके हुए सारे कार्य बनेंगे,
दूकान का बिज़नेस में लाभ प्रपात होगा और साडी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होगा,
किसी भी प्रकार का जादू टोना, काला जादू या नजर दोष की समस्या का नाश होगा और रक्षा होगी,
किसी भी प्रकार के क़ानूनी मामले में विजय प्राप्त होगी और मामलो का समाधान जल्दी प्राप्त होगा,
परिवार में सुख शांति आएगी और सभी लोग स्वस्थ्य रहेंगे,
समाज में मान सम्मान बढ़ेगा और प्रतिष्ठा मिलेगी.

इन विशेष पूजन वस्तुओ का प्रयोग दिवाली पर कैसे करें?

अगर आप इनमे से कोई भी पूजा वास्तु प्राप्त करना चाहते हैं और दिवाली पर प्रयोग करना चाहते हैं तो आप इसको हमसे प्राप्त करें किसी अन्य स्थान से नहीं क्योकि हम आपकी समस्या के अनुसार आपको सर्वश्रेष्ठ पूजा वस्तु प्रदान करेंगे और उसी समस्या के अनुसार इसकी सिद्धि करेंगे और आप विशेष रूप से लिखी हुई पूजा विधि भी प्रदान करेंगे।

वस्तु के साथ दी गई पूजा विधि की सहायता से आप इसका पूजन दिवाली, धनतेरस या नरक चतुर्दशी के दिन विधिपूर्वक कर सकते हैं और अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं।
 
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दीपावली की पूजा में शामिल करें ये चीजें, झट से प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी

हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष स्थान है और इस दौरान लोग लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं. इनकी पूजा करके वे अपने घर के लिए सुख-समृद्धि मांगते हैं और इस दौरान वे बहुत ही सतर्क रहकर पूजा करते हैं. दीपावली की पूजा में शामिल करें ये निचे बताई हुई  चीजें, इस विधि के साथ पूजा करने वालों के घर में हमेशा लक्ष्मी जी का वास रहता है| 
 
 


दीपावली के लिए सामान्य पूजन सामग्री (दीपक, प्रसाद, कुमकुम, फल-फूल आदि) के अतिरिक्त ऐसी 12 चीजें और है जिन्हें पूजन में शामिल करनी चाहिए, जिनके बारे में आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे|
 
स्वस्तिक

किसी भी पूजा में स्वस्तिक अवश्य बनाया जाता है. स्वास्तिक की चार भुजाएं उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम चारों दिशाओं को दर्शाती हैं. साथ ही, ये चार भुजाएं ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रमों का प्रतीक भी मानी गई हैं| 

पान

ये भी दीपावली पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है | पान खाने पर जिस प्रकार हमारे पेट की शुद्धि होती है, पाचन तंत्र को मदद मिलती है, ठीक उसी प्रकार पूजा के समय पान रखने पर घर की शुद्धि होती है और वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है|


खीर

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा में मिठाई के साथ ही घर पर बनी खीर भी रखनी चाहिए. शास्त्रों के अनुसा,र खीर लक्ष्मी का प्रिय व्यंजन है| इसीलिए प्रसाद के रूप में खीर अवश्य रखनी चाहिए|

वंदनवार

आम, पीपल और अशोक के नए कोमल पत्तों की माला को वंदनवार कहा जाता है. इसे दीपावली पर मुख्य द्वार पर बांधना चाहिए. इस संबंध में मान्यता है कि सभी देवी-देवता इन पत्तियों की महक से आकर्षित होकर घर में प्रवेश करते हैं|

ईख या गन्ना

महालक्ष्मी का एक रूप गजलक्ष्मी भी है और इस रूप में वे ऐरावत हाथी पर सवार दिखाई देती हैं| लक्ष्मी के ऐरावत हाथी की प्रिय खाद्य-सामग्री ईख यानी गन्ना है| दीपावली के दिन पूजा में गन्ना रखने से ऐरावत प्रसन्न रहते हैं और ऐरावत की प्रसन्नता से महालक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं|

पीली कौड़ी

लक्ष्मी पूजा की थाली में पीली कौड़ियां रखने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है | ये पीली कौड़ियां धन और श्री यानी लक्ष्मी की प्रतीक हैं. पूजा के बाद इन कौड़ियों को तिजोरी में रखने से लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है|

चावल यानी अक्षत

पुराने समय से ही पूजा में चावल का काफी अधिक महत्व बताया गया है | चावल को अक्षत कहा जाता है यानी जो खंडित नहीं है| इस वजह से चावल को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है |धार्मिक कार्यों में चावल एक धान के रूप में भी उपयोग किया जाता है | पूजा में चावल रखने के संबंध में एक मान्यता है यह हमारे घर पर कोई काला दाग भी नहीं लगने देता है यानी समाज में हमारी प्रतिष्ठा को बढ़ाता है|

बताशे या गुड़

ये भी दिवाली के लिए शुभ सामग्री है. लक्ष्मी-पूजन के बाद गुड़-बताशे का दान करने से धन में वृद्धि होती है. घर-परिवार में सुख और समृद्धि का विस्तार होता है, इसी वजह से प्रसाद के रूप में बताशे भगवान को अर्पित किए जाते हैं|

लच्छा या धागा

लच्छा कई धागों से मिलकर बनता है, इसीलिए यह संगठन की शक्ति का प्रतीक है, जिसे पूजा के समय कलाई पर बांधा जाता है. इस धागे को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है, इसके प्रभाव से हम कई परेशानियों से बचे रहते हैं |

रंगोली

लक्ष्मी पूजा के स्थान, प्रवेश द्वार और आंगन में रंगों से धार्मिक चिह्न कमल, स्वास्तिक, कलश, फूलपत्ती आदि से रंगोली बनाई जाती है | ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी रंगोली की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं|
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