हमारे वोट्स एप ग्रुप जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक करे ... : Click Here

हमारे फेसबुक पेज लाइक और फोलो करने के लिए यहाँ क्लिक करे ... : Click Here

हमारे टेलीग्राम ग्रुप जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक करे ... : Click Here
Click Here



Search This Website

Showing posts with label भारत के महापुरुष. Show all posts
Showing posts with label भारत के महापुरुष. Show all posts

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी जीवन सफ़र

अटल बिहारी बाजपेयी ही एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला। वह भारत के सबसे सम्माननीय और प्रेरक राजनीतिज्ञों में से एक रहे। वाजपेयी ने कई विभिन्न परिषदों और संगठनों के सदस्य के तौर पर भी अपनी सेवाएं दीं। वाजपेयी एक प्रभावशाली कवि और प्रखर वक्ता थे।श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत माता के एक ऐसे सपूत हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता से पूर्व और पश्चात भी अपना जीवन देश और देशवासियों के उत्थान एवं कल्याण हेतु जीया तथा जिनकी वाणी से असाधारण शब्दों को सुनकर आम जन उल्लासित होते रहे और जिनके कार्यों से देश का मस्तक ऊंचा हुआ ।


वास्तविक नाम : अटल बिहारी वाजपेयी
उपनाम : अटल जी
व्यवसाय : भारतीय राजनेता 
जन्मतिथि : 25 दिसंबर 1924
जन्मस्थान : ग्वालियर राज्य, ब्रिटिश भारत (अब, मध्य प्रदेश, भारत)
पिता :  कृष्ण बिहारी वाजपेयी (कवि और स्कूल मास्टर)
माता : कृष्णा देवी
भाई: अवध बिहारी वाजपेयी, प्रेम बिहारी वाजपेयी, सुदा बिहारी वाजपेयी
बहन:  उर्मिला मिश्रा, विमला मिश्रा, कमला देवी
शैक्षिक योग्यता  : 

ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से हिंदी
अंग्रेजी और संस्कृत के साथ स्नातक दयानंद एंग्लो-वैदिक कॉलेज,
कानपुर से राजनीति विज्ञान में एम.ए (M.A)

पुरस्कार    : 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
                   1994 में सर्व श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार दिया गया।
                   2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 
मृत्यु: अगस्त 16, 2018 (उम्र 93), एम्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली, भारत 

प्रारंभिक जीवन 

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ। वह अपने पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता कृष्णा देवी के सात बच्चों में से एक थे। उनके पिता एक विद्वान और स्कूल शिक्षक थे।इन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज - जो अब लक्ष्मीबाई कॉलेज कहलाता है - में तथा कानपुर उ. प्र. के डी. ए. वी. कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की और राजनीति विज्ञान में एम. ए.की उपाधि प्राप्त की. सन् 1993 मे कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा दर्शन शास्त्र में पी.एच डी की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए.

वाजपेयी की राजनैतिक यात्रा

वाजपेयी की राजनैतिक यात्रा की शुरुआत एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई। 

1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के कारण वह अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर लिए गए। इसी समय उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई, जो भारतीय जनसंघ यानी बी.जे.एस. के नेता थे। उनके राजनैतिक एजेंडे में वाजपेयी ने सहयोग किया। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मुकर्जी की जल्द ही मृत्यु हो गई और बी.जे.एस. की कमान वाजपेयी ने संभाली और इस संगठन के विचारों और एजेंडे को आगे बढ़ाया। 

सन 1954 में वह बलरामपुर सीट से संसद सदस्य निर्वाचित हुए। छोटी उम्र के बावजूद वाजपेयी के विस्तृत नजरिए और जानकारी ने उन्हें राजनीति जगत में सम्मान और स्थान दिलाने में मदद की। 

वर्ष 1957 में, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार (दूसरे आम चुनावों में) अटल जी को लोकसभा के लिए चुना गया था।

सन 1977 में जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी, वाजपेयी को विदेश मंत्री बनाया गया। दो वर्ष बाद उन्होंने चीन के साथ संबंधों पर चर्चा करने के लिए वहां की यात्रा की। भारत पाकिस्तान के 1971 के युद्ध के कारण प्रभावित हुए भारत-पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते को सुधारने के लिए उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा कर नई पहल की। जब जनता पार्टी ने आर.एस.एस. पर हमला किया, तब उन्होंने 1979 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 

सन 1980 में भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने की पहल उनके व बीजेएस तथा आरएसएस से आए लालकृष्ण आडवाणी और भैरो सिंह शेखावत जैसे साथियों ने रखी। स्थापना के बाद पहले पांच साल वाजपेयी इस पार्टी के अध्यक्ष रहे।

सन 1992 में देश की उन्नति में योगदान के लिए पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया।

सन 1996 में  पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने।

सन 1998 में  दूसरी बार भी देश के प्रधानमंत्री बने।

सन 1999 में  तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने और दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा संचालित कर इतिहास रचा ।

सन 2005 में  दिसंबर माह में राजनीति से संन्यास ले लिया।

सन 2015 में  देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और उत्कृष्ट सांसद होने के अलावा, अटल बिहारी वाजपेयी एक प्रसिद्ध कवि और सभी राजनीतिक दलों में सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व हैं।

वाजपेयी समस्त जीवन अविवहित रहे। उन्होंने राजकुमारी कौल और बीएन कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को गोद लिया था।

मृत्यु

 

सन 2009 में उन्हे दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता ही गया।  11  जून 2018 को उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था, जहाँ 16 अगस्त 2018 को वे परलोक सिधार गये। 17 अगस्त को उनकी दत्‍तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या मुखाग्नि दी। राजघाट के पास शान्ति वन में स्मृति स्थल में उनकी समाधि बनायी गयी है।
Read More »

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी (मोहनदास करमचंद गाँधी) के बारे में संपूर्ण जानकारी

इस पोस्ट  में हम आपको हमारे राष्ट्रपिता 'महात्मा गांधीजी ' के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे |

पूरा नाम: मोहनदास करमचंद गाँधी 
जन्म स्थान: पोरबंदर , गुजरात , भारत 
जन्म दिनाक : २ अक्टूम्बर . १८६९
पिता : करमचंद गाँधी
माता: पुतलीबाई 
अभ्यास : एल .एल बी , वकीलात 
पुत्र: हरिलाल,मणिलाल , रामदास , देवदास 
मृत्यु: ३० जनवरी १९४८  ,दिल्ही  



" देदी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल , साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल ", ये पंक्ति जिनके लिए बनायीं गयी है वो  साबरमती के संत "महात्मा गांधीजी" जिसे हम प्यार से 'बापू ' बुलाते है इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है | गांधीजी ने अपनी मेट्रिक परीक्षा  राजकोट की आल्फ्रेड हाइस्कुल में से पूरी की|कालेज की पढाई शामलदास कालेज भावनगर में प्रथम सत्र पूर्ण करके लंडन पहुच गए , और वहा से बेरिस्टर की पदवी प्राप्त करके भारत परत आ गए | उसके बाद वो मुंबई और राजकोट की असफल वकीलात बाद  दक्षीण आफ्रिका पहुचे|१८९४ में वहा के हिन्दियो के हक के लिए 'नाताल इंडियन कोंग्रेस 'की स्थापना की |फिर दक्षीण आफ्रिका में हुए भारतीयों से अन्याय के करान सन १९१५ में वे भारत लौटे और अहमदबाद में 'सत्याग्रह आश्रम ' की स्थापना की | 

गांधी जी ने वर्ष १९१७-१८के दौरान बिहार के चम्‍पारण नामक स्‍थान के खेतों में पहली बार भारत में सत्‍याग्रह का प्रयोग किया। यहाँ अकाल के समय ग़रीब किसानों को अपने जीवित रहने के लिए जरूरी खाद्य फ़सलें उगाने के स्‍थान पर नील की खेती करने के लिए ज़ोर डाला जा रहा था।उस समय गांधीजी ने अंग्रेजो के सामने सत्याग्रह करके उनको उनका हक दिलवाया |सन १८१८ में 'खेडा सत्याग्रह' किया| सन १८१९ में 'रोलेक्ट एक्ट ' का विरोध किया|सन १९२० में इंडियन नॅशनल कोंग्रेस के सहकार से 'असहकार आन्दोलन ' की शुरुआत की  उसी ही वर्ष में उस कार्यक्रम के भाग के रूप में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की | सन १९२२ में अंग्रेज अमलदारो ने गांधीजी को बंदी बनाया और जेल में ले गए |दो साल बाद १९२४ में उनको रिहा किये गए |सन १९२४-२५ में 'अस्पृश्यता निवारण ' और ' खादी के उत्पादन का रचनात्मक कार्य की शुरुआत की | 'हरिजन बंधू ' और 'हरिजन सेवक ' वृत पत्रों का संपादन किया | १९२८ में बारडोली सत्याग्रह में सहयोग दिया | सन १९३० में नमक के कायदे के लिए दांडी यात्रा आरंभ की और वहा नमक का कानून तोड़ दिया और अंग्रेज सरकार को जुका दिया| सन १९४२ में उन्होंने 'हिन्द छोड़ो 'आन्दोलन के बाद अंग्रेजो भारत से नकल जायेंगे वह तय कर दिया | आखिर में सन १९४७ की १५ अगस्त को भारत देश स्वंतंत्र हो गया | 

सदियों से गुलाम बने भारत देश को स्वतंत्र कराना गांधीजी का सबसे बड़ा महान कार्य था |दुनिया के इतिहास में यह एक नया प्रयोग था , इसी लिए गांधीजी 'युग पुरुष ' कहलाए |गांधीजी पवित्र ह्दय  के महापुरुष और महान समाज सुधारक थे | उन्होंने नए समाज की नीव डाली |अछूतो की दुर्दशा उनसे देखि न  गई और उन्होंने उनका उद्धार  करने का बीड़ा उठाया |गरीब भारत को उन्होंने तकली और चरखे द्वारा रोजी रोटी दी |मद्य-निषेध , नीरक्षरता-निवारण , स्त्री -शिक्षा, ग्रामोद्वार आदि के लिए उन्होंने राष्ट्रभाषा का प्रचार किया और हिन्दू -मुस्लिम एकता के लिए वे आजीवन प्रयत्न करते रहे| 

गांधीजी सत्य और अहिंसा के पूंजारी थे | उनके जीवन में सादगी की महक आती थी | दुर्बल शरीर और घुटनों से ऊँची एकमात्र धोती पहननेवाले गांधीजी भारत की गरीबी के प्रतिक थे | दया , धर्मं और प्रेम की त्रिवेणी उनके हदय से लगातार बहा करती थी | अंग्रेजो के प्रति भी वो सदा क्षमाशील रहे | दक्षीण  अफ्रीका में जिस मीर आलम पठान ने उनके दात तोड़ दिए थे , उसे भी उन्होंने जेल से छुडाया और अभय दान दिया |वे अन्याय को दूर करने के लिए अपने जीवन को भी दाव पे लगा देने से नहीं डरते थे |आखिर में ३० जनवरी १९४८  की शाम को जब वह एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे, तब एक युवा हिन्दू कट्टरपंथी नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी |

सचमुच , गांधीजी ने अपना सर्वस्व न्योछावर करके वर्त्तमान भारत का नवनिर्माण किया | वास्तव में वे हमारे राम, महावीर और बुद्ध थे | 

Read More »

हररोज नई जानकारी आपके मोबाईल में पाने के लिए इस फेसबुक पेज को लाइक करे

Any Problem Or Suggestion Please Submit Here

Name

Email *

Message *