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श्यामबाबा(बर्बरीक) का इतिहास और खाटू श्यामजी मंदिर जो राजस्थान के सीकर में स्थित है

राजस्थान के सीकर जिले में खाटू नगर में श्री खाटू श्याम जी का सुप्रसिद्ध मंदिर है , क्योंकि यहीं पर उनके शीश को दफ़नाया गया था।जहा हररोज हजारो भक्तो आते है और उनकी मन्नते पूरी करते है |  मान्यता है कि पहले यहां एक गाय नियमित रूप से दुध की धारा स्वयं बहाती थी। कुछ वर्षों पश्चात वहां खुदाई हुई तो एक शीश प्रकट हुआ। आरंभ में इसे ब्राह्मण को सौंपा गया। मान्यता है कि इसके कुछ समय बाद ही स्वपन में राजा को दिखाई देकर यहा पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया इसके पश्चात यहां मंदिर का निर्माण हुआ कार्तिक मास की एकादशी को यह शीश मंदिर में स्थापित किया गया। इसी दिन को बाबा खाटू श्याम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है।



लोकेशन :खाटूगाव ,सीकरजिल्ला ,राजस्थान 
मंदिर का निर्माण:  1027 ई. में रूपसिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने करवाया था 
प्रवेश : मुफ्त
वाहन पार्किंग : हा
फोटोग्राफी : मंदिर के अन्दर मना
समय :  गर्मियों के दिनों में प्रात: 4:30 से  1:00 बजे और सायं 5:00 बजे से रात्रि 10 बजे तक
सर्दियों में प्रात: के 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे और सांय 4:00 बजे से रात्रि 9 बजे तक
मुलाकात के लिए समय : करीबन 1 घंटा
फोन नंबर : +98963 28825, 9812038024, 9996140740, 9812329998, 9992410500, 9813022888, 9812002327
मुलाकात के लिए सही समय : ओक्टो से फरवरी तक 

नजदीकी रेलवे स्टेशन : जयपुर रेलवे स्टेशन (63 किमी )
नजदीकी हवाई अड्डा :जयपुर हवाई अड्डा (63 किमी )
श्यामबाबा(बर्बरीक) का इतिहास  जाने 


बर्बरीक बचपन में एक वीर और तेजस्वी बालक थे. बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण और अपनी माँ मौरवी से युद्धकला, कौशल सीखकर निपुणता प्राप्त कर ली थी. बर्बरीक ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिसके आशीर्वादस्वरुप भगवान ने शिव ने बर्बरीक को 3 चमत्कारी बाण प्रदान किए. इसी कारणवश बर्बरीक का नाम तीन बाणधारी के रूप में भी प्रसिद्ध है. भगवान अग्निदेव ने बर्बरीक को एक दिव्य धनुष दिया था, जिससे वो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने में समर्थ थे.


जब कौरवों-पांडवों का युद्ध होने का सूचना बर्बरीक को मिली तो उन्होंने भी युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया. बर्बरीक अपनी माँ का आशीर्वाद लिए और उन्हें हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन देकर निकल पड़े. इसी वचन के कारण हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा यह बात प्रसिद्ध हुई.

जब बर्बरीक जा रहे थे तो उन्हें मार्ग में एक ब्राह्मण मिला. यह ब्राह्मण कोई और नहीं, भगवान श्री कृष्ण थे जोकि बर्बरीक की परीक्षा लेना चाहते थे. ब्राह्मण बने श्री कृष्ण ने बर्बरीक से प्रश्न किया कि वो मात्र 3 बाण लेकर लड़ने को जा रहा है ? मात्र 3 बाण से कोई युद्ध कैसे लड़ सकता है. बर्बरीक ने कहा कि उनका एक ही बाण शत्रु सेना को समाप्त करने में सक्षम है और इसके बाद भी वह तीर नष्ट न होकर वापस उनके तरकश में आ जायेगा. अतः अगर तीनों तीर के उपयोग से तो सम्पूर्ण जगत का विनाश किया जा सकता है.

ब्राह्मण ने बर्बरीक (Barbarik) से एक पीपल के वृक्ष की ओर इशारा करके कहा कि वो एक बाण से पेड़ के सारे पत्तों को भेदकर दिखाए. बर्बरीक ने भगवान का ध्यान कर एक बाण छोड़ दिया. उस बाण ने पीपल के सारे पत्तों को छेद दिया और उसके बाद बाण ब्राह्मण बने कृष्ण के पैर के चारों तरफ घूमने लगा. असल में कृष्ण ने एक पत्ता अपने पैर के नीचे छिपा दिया था. बर्बरीक समझ गये कि तीर उसी पत्ते को भेदने के लिए ब्राह्मण के पैर के चक्कर लगा रहा है. बर्बरीक बोले – हे ब्राह्मण अपना पैर हटा लो, नहीं तो ये आपके पैर को वेध देगा.

श्री कृष्ण बर्बरीक के पराक्रम से प्रसन्न हुए. उन्होंने पूंछा कि बर्बरीक किस पक्ष की तरफ से युद्ध करेंगे. बर्बरीक बोले कि उन्होंने लड़ने के लिए कोई पक्ष निर्धारित किया है, वो तो बस अपने वचन अनुसार हारे हुए पक्ष की ओर से लड़ेंगे. श्री कृष्ण ये सुनकर विचारमग्न हो गये क्योकि बर्बरीक के इस वचन के बारे में कौरव जानते थे. कौरवों ने योजना बनाई थी कि युद्ध के पहले दिन वो कम सेना के साथ युद्ध करेंगे. इससे कौरव युद्ध में हराने लगेंगे, जिसके कारण बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ने आ जायेंगे. अगर बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ेंगे तो उनके चमत्कारी बाण पांडवों का नाश कर देंगे.

कौरवों की योजना विफल करने के लिए ब्राह्मण बने कृष्ण ने बर्बरीक से एक दान देने का वचन माँगा. बर्बरीक ने दान देने का वचन दे दिया. अब ब्राह्मण ने बर्बरीक से कहा कि उसे दान में बर्बरीक का सिर चाहिए. इस अनोखे दान की मांग सुनकर बर्बरीक आश्चर्यचकित हुए और समझ गये कि यह ब्राह्मण कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है. बर्बरीक ने प्रार्थना कि वो दिए गये वचन अनुसार अपने शीश का दान अवश्य करेंगे, लेकिन पहले ब्राह्मणदेव अपने वास्तविक रूप में प्रकट हों.

भगवान कृष्ण अपने असली रूप में प्रकट हुए. बर्बरीक बोले कि हे देव मैं अपना शीश देने के लिए बचनबद्ध हूँ लेकिन मेरी युद्ध अपनी आँखों से देखने की इच्छा है. श्री कृष्ण बर्बरीक ने बर्बरीक की वचनबद्धता से प्रसन्न होकर उसकी इच्छा पूरी करने का आशीर्वाद दिया. बर्बरीक ने अपना शीश काटकर कृष्ण को दे दिया. श्री कृष्ण ने बर्बरीक के सिर को 14 देवियों के द्वारा अमृत से सींचकर युद्धभूमि के पास एक पहाड़ी पर स्थित कर दिया, जहाँ से बर्बरीक युद्ध का दृश्य देख सकें. इसके पश्चात कृष्ण ने बर्बरीक के धड़ का शास्त्रोक्त विधि से अंतिम संस्कार कर दिया.

महाभारत का महान युद्ध समाप्त हुआ और पांडव विजयी हुए. विजय के बाद पांडवों में यह बहस होने लगी कि इस विजय का श्रेय किस योद्धा को जाता है. श्री कृष्ण ने कहा – चूंकि बर्बरीक इस युद्ध के साक्षी रहे हैं अतः इस प्रश्न का उत्तर उन्ही से जानना चाहिए. तब परमवीर बर्बरीक ने कहा कि इस युद्ध की विजय का श्रेय एकमात्र श्री कृष्ण को जाता है, क्योकि यह सब कुछ श्री कृष्ण की उत्कृष्ट युद्धनीति के कारण ही सम्भव हुआ. विजय के पीछे सबकुछ श्री कृष्ण की ही माया थी.

बर्बरीक के इस सत्य वचन से देवताओं ने बर्बरीक पर पुष्पों की वर्षा की और उनके गुणगान गाने लगे. श्री कृष्ण वीर बर्बरीक की महानता से अति प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा – हे वीर बर्बरीक आप महान है. मेरे आशीर्वाद स्वरुप आज से आप मेरे नाम श्याम से प्रसिद्ध होओगे. कलियुग में आप कृष्णअवतार रूप में पूजे जायेंगे और अपने भक्तों के मनोरथ पूर्ण करेंगे.


भगवान श्री कृष्ण का वचन सिद्ध हुआ और आज हम देखते भी हैं कि भगवान श्री खाटू श्याम बाबा जी अपने भक्तों पर निरंतर अपनी कृपा बनाये रखते हैं. बाबा श्याम अपने वचन अनुसार हारे का सहारा बनते हैं. इसीलिए जो सारी दुनिया से हारा सताया गया होता है वो भी अगर सच्चे मन से बाबा श्याम के नामों का सच्चे मन से नाम ले और स्मरण करे तो उसका कल्याण अवश्य ही होता है. श्री खाटू श्याम बाबा (Shri Khatu Shyam Baba ji) की महिमा अपरम्पार है, सश्रद्धा विनती है कि बाबा श्याम इसी प्रकार अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाये रखें.
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अचलेश्वर महादेव मंदिर जहा दिन में तीन बार रंग बदलता है यह शिवलिंग जो राजस्थान अचलगढ धोलपुर में स्थित है जहा हर मन्नत पूरी होती है

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में जहां हनुमान दिन में तीन बार रूप बदलते हैं वहीं उज्जैन में भैरव शराब पीते हैं। ऐसी और भी कई जगहें मौजूद हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते। खैर, आज हम आपको बताएंगे राजस्थान के अचलेश्वर महादेव मंदिर के बारे में। वहां शिवलिंग तीन बार रंग बदलता है।



लोकेशन :धोलपुर ,राजस्थान 
प्रवेश : मुफ्त
वाहन पार्किंग : हा
फोटोग्राफी : मंदिर के अन्दर मना
समय : सुबह के 4:00  से रात के 10 :00 तक
अमावश्या स्पेशल समय : रात के 12:00 बजे से सुबह के 1 :00 बजे तक
मुलाकात के लिए समय : करीबन 1 घंटा
मुलाकात के लिए सही समय : हररोज सुबह -शाम
नजदीकी रेलवे स्टेशन : धोलपुर रेलवे स्टेशन जंक्शन
नजदीकी हवाई अड्डा :आगरा हवाई अड्डा


इस शिवलिंग पर एक निशान भी है जिसे पूजा जाता है। उस निशान को लेकर भी एक मान्यता जुड़ी हुई है। कहां है यह मंदिर? यह कब बना था? इसकी कथा क्या है? यहां किसकी पूजाहोती है? ऐसे ही कई सवालों के जवाब के लिए पढ़िए यह स्टोरी।



अचलेश्वर महादेव मंदिर धौलपुर, राजस्थान के माउण्ट आबू में स्थित है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान शिव तथा उनके शिवलिंग की नहीं, बल्कि उनके पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है। यहाँ भगवान शिव अंगूठे के रूप में विराजते हैं|अचलेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग तीन बार रंग बदलता है। सुबह शिवलिंग का कलर लाल होता है, दोपहर को केसरिया और शाम को कलर सांवला हो जाता है।मंदिर अतिप्राचीन है। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 2,500 साल पहले हुई थी।




मंदिर में पंच धातु के नंदी की एक विशाल प्रतिमा है, जिसका वजन चार टन है। शिवलिंग के ऊपर एक तरफ पैर के अंगूठे का निशान उभरा हुआ है, जिसे स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है

यह देवाधिदेव शिव का दाहिना अंगूठा माना जाता है। अँगूठे के बारे में क्या मान्यता है इसे जानने के लिए आगे पढ़ें। 

यह है मान्यता

मान्यता है कि इसी अंगूठे ने पूरे माउण्ट आबू के पहाड़ को थाम रखा है, जिस दिन अंगूठे का निशान गायब हो जाएगा, माउण्ट आबू का पहाड़ खत्म हो जाएगा।

भगवान के दस अवतार के दर्शन 

गर्भगृह के बाहर भगवान विष्णु के दस अवतारों की मूर्तियां भी हैं। इनमें वराह, नरसिंह, वामन, कच्छप, मत्स्य, कृष्ण, राम, परशुराम, बुद्ध व कलंगी अवतारों की काले पत्थर की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। क्या हैं पौराणिक कथाएं, ये जानिए आगे।

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अचलेश्वर महादेव मंदिर गूगल मेप 


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विश्व प्रसिद्द चार धाम गंगोत्री ,यमुनोत्री ,केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के शीतकालीन कपाट छे महीने के बंद होने की तारीख

भारत देश के उपरी हिस्सों में अब शीत ऋतू  के कारळ पूरा बर्फ से ढक् जाता है| इसी लिए सभी मंदिरे बंद होजाते है | यहाँ हम आज आपके लिए विश्व प्रसिद्द चार धाम गंगोत्री ,यमुनोत्री ,केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के शीतकालीन कपाट छे महीने के बंद होने की तारीख बताने जा रहे है | आशा है आपको ये आर्टिकल पसंद आएगा |

विश्व प्रसिद्ध गंगोत्रीधाम के कपाट बंद होने का शुभ मुहूर्त तय हो गया है। गंगोत्री धाम के कपाट 8 नवंबर को दोपहर 12.30 मिनट पर बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद देश-विदेश के श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखवा) में कर सकेंगे।


गंगोत्री धाम के कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त 17 अक्टूबर बुधवार को नवरात्र के शुभ अवसर पर तीर्थ पुरोहितों ने निकाला। जिसके बाद मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने कपाट बंद करने की शुभ तिथि और शुभ समय की औपचारिक घोषणा भी की।

इस बार 8 नवंबर को सुबह 8.30 बजे मां गंगा के मुकुट को उतारा जाएगा। उसके बाद निर्वाण दर्शन होंगे। वेद मंत्रों के साथ मां की मूर्ति का महाभिषेक होता है।

उसके बाद विधिवत हवन पूजा-अर्चना के साथ कपाट बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने का शुभ मूर्हूत दोपहर 12.30 बजे तय किया गया है। विधिविधान से पूजा अर्चना के बाद गंगा की उत्सव डोली को मंदिर परिसर से बाहर निकाली जाएगी। जिसके बाद डोली मुखवा के लिए प्रस्थान करेगी। डोली रात्रि निवास चंडेश्वरी देवी मंदिर में निवास करेंगे। 9 नवंबर सुबह विधिविधान के साथ मंदिर से डोली मुखवा के लिए प्रस्थान करेगी।

श्री यमनोत्री धाम के कपाट भाई दूज 9 नवम्बर को दिन में 2.15 मिनिट पर शीतकाल के बंद कर दिए जायेंगे।
भगवती माँ यमुना की डोली को उनके मायके खरसाली लाया जायेगा,माँ की 6 महीने पूजा यही होगी |

चार धामों के कपाट बंद होने की तिथियां

➤8 नवंबर- गंगोत्रीधाम 
➤9 नवंबर- यमुनोत्रीधाम
➤9 नवंबर- केदारनाथ सुबह साढ़े आठ बजे
➤20 नवम्बर- बद्रीनाथ दोपहर 3 बजकर 21 मिनट
➤22 नवंबर- मदमहेश्वर
➤29 अक्टूबर- तुंगनाथ

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श्री गणेश मंदिर गणपतपुरा (गणपति पूरा) स्वयंभू गणेश कोठ गाव में है जो अहमदाबाद के नजदीक गुजरात में स्थित है

गणपतपूरा और गणपतिपूरा जो कोठ गाव में गणपतिदादा का भव्य मंदिर बना है |गणपतिपूरा अहमदाबाद से करीबन 62 किमी की दुरी पर धोलका तहसील में बसा है | यहाँ गणपति दादा का अलौकिक मंदिर है |लाखो श्रद्धालु  यहाँ आते है और बापा के दिव्य दर्शन करके पावन होते है |यहाँ हम आपको गणपतिपूरा मंदिर के बारे में कुछ माहिती बताएँगे |



लोकेशन : कोठ गाव, अहमदाबाद से करीबन 62 किमी
स्थापना वर्ष : 2008
संचालित : गणपति महाराज ट्रस्ट
प्रवेश : फ्री
मुख्य आकर्षण : गणपति दादा की आह्लादक मूर्ति ,और मंदिर का मुख्य द्वार
फोटोग्राफी : मंदिर के अन्दर मना
मुलाकात के लिए समय : करीबन 1  घंटा 
मुलाकात के लिए सही समय : हर महीने की संकष्टी चतुर्थी 
मंदिर के उत्सव : गणेश उत्सव क्लिक करे
फोन नंबर : +91-9374003049
नजदीकी रेलवे स्टेशन : अरणेज रेल्वेस्टेशन (6 किमी )
नजदीकी हवाई अड्डा : अहमदाबाद हवाई अड्डा (67 किमी )


अहमदाबाद से करीबन 62 किमी की दुरी पर धोलका तहसील में बसा हुआ एक छोटा सा गाव जिसका नाम है कोठ आज स्वयंभू गणपति दादा के प्रगट्य से सारे भारत में मशहूर हो गया है | कोठ गाव में गणपति का मंदिर है इसी वजे से उसे गणेश पूरा और गणपति पूरा के नाम से जाना जाता है | यहाँ मंदिर में गणपति दादा की 6 फिट की स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन होते है | यह प्रतिमा की विशेषता ये है की गणेशजी की सुंड बायनी और की है और एअकदंती प्रतिमा है | यह प्रतिमा पूर्वाभिमुख ,मंदिर के गेट से ही दिखाई देती है | मंदिर का प्रवेश कलात्मक और आकर्षक लाल पत्थरो में से बनाया गया है | गणपति बाप का सिंहाशन सोने में से बनाया गया है |सुबह शाम अलग अलग समय पर आरती और पूजा की जाती है |हर महीने हर महीने की संकष्टी चतुर्थी पर लाखो श्रद्धालु यहाँ बापा का दर्शन करने आते है | इस दिन यहाँ मंदिर ट्रस्ट द्वारा चाय पानी एवं नि:शुल्क भोजन की भी व्यवस्था की जाती है | मंदिर ट्रस्ट द्वारा गणपति बापा के प्रिय मोदक प्रसाद के रूप में दिए जाते है | इस दिन बाप्पा को 6000 किलो बूंदी के लाडू और 1500 किलो चूरमे के लाडू का भोग चढाया जाता है | मंदिर के गेट के बहार यहाँ की मशहुर केले के वेफर काफी लोग खरीद कर घर ले जाते है |

गणेश मंदिर गणपति पूरा का इतिहास 

प्राचीनकाल में कहा गया है की यहाँ पर विक्रम संवत 933 अषाढ़ महीने के वद पक्ष के चोथे दिन (अषाढ 4 ) रविवार का दिन था तब हाथेल की जमीं का केरडा के जाले के खोदकाम के वक्त गणेशजी की प्रतिमा पाव में सोने के पायल ,कान में कुंडल,माथे पे मुकुट ,और समग्र आभूषण के साथ प्रगट हुई थी |यह प्रतिमा को ले जाने के लिए आसपास के गाव वालो में झगडा हो गया | उसके बाद चमत्कार हुआ ,प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखा गया फिर वो गाड़ी बिना बैल के अपने आप चलने लगी और गणपतिपूरा के ऊँचे भाग पर जाकर खड़ी रही | यह जगह दुदा भरवाड और गोकल की शक्तिमता की स्थापना की गई थी वहा जाकर प्रतिमा अपने आप नीचे आ गई |तबसे यहाँ का नाम गणपतिपूरा पड गया ,और यहाँ आज बड़ा सा गणपति बापा का मंदिर बना हुआ है |हर महीने की संकष्टी चतुर्थी पर यहाँ करीबन दो से ढाई लाख श्रद्धालु यहाँ आते है और लाखो रुपये का दान करते है |हर एक की मनोकामना बाप्पा पूरी करता है | गणपतपूरा के सामने ही अरणेज में मा बुटभवानी का भी मंदिर है , जो इनका भी दर्शन करके जाना |

गणेश मंदिर गणपति पूरा आरती एवं दर्शन के समय 

दर्शन के लिए समय : 5:30 AM to 8:30 PM
आरती का समय : सुबह 5:30  बजे , शाम :6 :00 बजे 
संकष्टी चतुर्थी दर्शन समय : सुबह 5:30  बजे से रात के  चन्द्रोदय तक 
संकष्टी चतुर्थी आरती समय : सुबह 5:30  बजे , शाम :6 :00 बजे , चन्द्रोदय  बाद 



 कैसे पहुचे गणेश मंदिर गणपतिपूरा (कोठ )


हवाई जहाज के जरीए :  यहाँ से नजदीकी हवाई अड्डा अहमदाबाद हवाई अड्डा पड़ता है जो करीबन 67 कीमी की दुरी पर है | वहा से आप टेक्सी और बस के जरिये यहाँ पहुच शकते है |

रेलवे के जरीए : यहाँ से नजदीकी रेलवे स्टेशन अरणेज स्टेशन करीबन 6 किमी की दुरी पर है |

बस के जरीए : अहमदाबाद से बहुत से सरकारी बसे और टेक्सी मिल शकती है और संकष्टी चतुर्थी के दिन भी बहुत सारी बस का इंतजाम किया जाता है |

गणपति मंदिर गणपतपुरा गूगल मेप

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कुबेर भंडारी शिव मंदिर करनाली वडोदरा गुजरात

गुजरात के वडोदरा शहर से करीबन 60 किमी की दुरी पर डभोई के पास करनाली गाव आया हुआ है ,जो हमारे वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने दतक लिया है वहा नर्मदा नदी के किनारे स्वयंभू भगवान शिव का मंदिर है | भगवान शिव यहाँ कुबेर भंडारी के नाम से जाने जाते है |इस पोस्ट में हम आपको कुबेर भंडारी मंदिर के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे , आशा है आपको यह जानकारी आपको पसंद आएगी |






लोकेशन : गुजरात के वडोदरा से 60 किमी दुरी पर करनाली गाव के नर्मदा नदी के किनारे पर
प्रवेश : मुफ्त
स्पेशल दर्शन के लिए : 250/-रु टिकट
वाहन पार्किंग : हा
फोटोग्राफी : मंदिर के अन्दर मना
समय : सुबह के 4:00  से रात के 10 :00 तक
अमावश्या स्पेशल समय : रात के 12:00 बजे से सुबह के 1 :00 बजे तक
मुलाकात के लिए समय : करीबन 1 घंटा
फोन नंबर : 026632333777
मुलाकात के लिए सही समय : हररोज सुबह -शाम (अमावश्या के दिन और सोमवती अमावश्या के दिन पर बहुत लोगो की भीड़ रहती है )
नजदीकी रेलवे स्टेशन :  वडोदरा रेलवे स्टेशन (60 किमी )
नजदीकी हवाई अड्डा : वडोदरा हवाई अड्डा (60 किमी )




कुबेर भंडारी मंदिर जहा भगवान शिव का स्वयंभू प्रगट हुआ शिवलिंग है , जो डभोई तहसील में करनाली गाव में नर्मदा नदी के किनारे करीबन 800 फिट  की ऊंचाई पर स्थित है | यह मंदिर करीबन 2500 वर्षो पुराना मंदिर है | यहाँ भगवन शिव के शिवलिंग के आलावा गणेशजी ,महाकाली ,हनुमानजी और रणछोड़राइ का भी मंदिर है | अमावश्या के दिन यहाँ पर करीबन 5 लाख से ज्यादा लोग कुबेर भंडारी दादा का आशीर्वाद लेने आते है |अमावश्या पर दादा के दर्शन रात को 12:00 बजे से शुरू हो जाते है | करीबन २ किमी से ज्यादा लम्बी कतार में 4 से 5 घंटे खड़े रहने के बाद कुबेर भंडारी दादा के दर्शन होते है  | यहाँ पर श्रद्धालुओ  की हर मनोकामना पूर्ण होती और नि:संतान महिलाओ को संतान प्राप्ति भी होती है इसी लिए अमावश्या के दिन दर्शन करने लाखो लोग आते है |यहाँ लोग भगवान को दूध,बिलिपत्र,शहदगन्ने का रस ,सुगन्धित द्रव्य,फल,फुल आदि अर्पण करते है | जिन को कतार में खड़े रहने की तकलीफ हो उनके लिए और बुजुर्गो के लिए मंदिर की कमिटी द्वारा यहाँ पर स्पेशल जल्दी दर्शन की भी व्यवस्था की गई है , जो टिकिट काउंटर से टिकट लेकर जल्दी दर्शन हो शके | मंदिर के बायने हिस्से में नर्मदा नदी का तट है ,जो बहुत ही सुन्दर दीखता है | अमावश्या के दिन दर्शन और नर्मदा स्नान करके लोग धन्य होते है |




कहा जाता है की कुबेर रावण का छोटा भाई था | रावण ने भगवन शिव को प्रसन्न करके बहुत शक्तिशाली बन गया और उनके भाई को लंका से निकल दिया | फिर कुबेर नर्मदा नदी के किनारे करनाली आकर भगवान शिव का तप (ध्यान ) करने लगा और यहाँ पर महाकाली माता को उनकी रक्षा करने की प्रार्थना की | उनकी भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए और यहाँ पर प्रगट हुए  ,पर लंका का राज्य वापस दिलाने में असमर्थ थे  इसी लिए उनको देवताओ के धन की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई | इसी लिए इन्हें धन के देवता " कुबेर भंडारी " कहा जाता है |भगवान शिव ने उन्हें अपने साथ स्थान दिया ,और इस जगह पर स्वयंम भू प्रगट हुए तबसे ये स्थान लोगो के आस्था का केंद्र बन गया है | करनाली  के सामने किनारे निलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स बहुत ही सुन्दर दीखता है | आप नौका से करीबन 15 मिनट में वहा पहुच सकते है | 



कैसे पहुचे कुबेर भंडारी मंदिर करनाली 



हवाई जहाज के माध्यम से  : नजदीकी हवाई अड्डा वडोदरा हवाई अड्डा करीबन 60 किमी पड़ता है ,वहा से आप टेक्सी या बस के जरिये पहुच सकते है |

रेलवे के माध्यम से : नजदीकी रेलवे स्टेशन वडोदरा करीबन 60 किमी पड़ता है ,वहा से आप टेक्सी या बस के जरिये पहुच सकते है |

रास्ते के माध्यम से : वडोदरा से आप कई रिक्शा और टेक्सी के जरिये मंदिर पुच सकते है | अमावश्या के दिन वडोदरा से स्पेशल करनाली के लिए परिवहन द्वारा बस का इंतजाम किया जाता है , जिससे सरलता से पहुच शके |

नौका के मध्य से :  चनोद ,पोइचा से आप नौका से भी कुबेर भंडारी के मंदिर पहुच शकते है |



कुबेर भंडारी मंदिर के  फोटोग्राफ 





















कुबेर भंडारी मंदिर गूगल मेप 




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नीलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स पोइचा नर्मदा गुजरात

वडोदरा से करिबन ८५  किलोमीटर की दुरी पर बसा निलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर पोइचा एक अनोखा आकर्षण, जो नर्मदा नदी के किनारे बना हुआ है, जहा प्रकृति की गोद में भगवान स्वामीनारायण का बहुत ही बड़ा मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स भी बना है |करीबन १०५ एकर में बना है ये निलकंठधाम | यहाँ पर निलकंठधाम  स्वामीनारायण मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स  इसी तरह दो हिस्सों में बाटा गया है | सहजानंद यूनिवर्स यहाँ का प्रमुख आकर्षण है |हररोज बहुत सारे लोग यहाँ आते है और भगवान का दर्शन करके पावन होते है |हम आपको निलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स के बारे में कुछ माहिती देंगे जैसे मंदिर का समय,फोन नंबर ,कैसे यहाँ तक पहुचे जैसे संपूर्ण माहिती देंगे |





निलकंठ धाम स्वामीनारायण मंदिर 



लोकेशन : पोइचा गाव,नर्मदा नदी के किनारे,नर्मदा जिल्ला ,राजपिपला के नजदीक ,गुजरात
स्थापना वर्ष : २०१३
संचालित : राजकोट स्वामीनारायण गुरुकुल
कुल जगह : १०५ एकर
प्रवेश : मुफ्त
वाहन पार्किंग : हा (पेय)
फोटोग्राफी : हा
समय : सुबह के ६:०० बजे से शाम के ९:०० बजे तक
मुलाकात के लिए समय : करीबन २ घंटे
मुलाकात के लिए सही समय : हररोज शाम के वक्त
फोन नंबर : (+91) 8000000218, (+91) 9099621000
रूम बुकिंग नं : (+91) 9925033499
नजदीकी रेलवे स्टेशन : राजपिपला और वडोदरा
नजदीकी हवाई अड्डा : वडोदरा हवाई अड्डा







भारतीय संस्कृति को प्रजवाल्लित करता हुआ एक उदहारण ,नीलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर  नर्मदा नदी के किनारे पर स्थित पोइचा गाव में बनाया गया है | करीबन 105 एकर जमीन पर फैला हुआ यह मंदिर  भगवान स्वामीनारायण का है  जो राजकोट स्वामीनारायण गुरुकुल संचालित है | रविवार के दिन और छुट्टीयो के दिनों में यहाँ मनुष्यों का मेला लगा रहता है |इन मंदिर का मुख्य दरवाजे पर भगवान नटराज की बड़ी मूर्ति स्थापित है , जो आह्लादक लग रही है | फिर अन्दर प्रवेश करते ही मुख्य मंदिर का मुख्य गर्भ गृह एक सरोवर के अन्दर बनाया हुआ है | इस सरोवर के अन्दर भगवान् स्वामीनारायण की जीवनी ,शिवजी का मंदिर ,और कई छोटे छोटे मंदिर बनाये गए है |साथ में गणेशजी और हनुमानजी का भी सुंदर मंदिर बनाया गया है |निचे की और 108 गौमुखी गंगा से बहते नर्मदा नदी के जल से स्नान करने के लिए लाखो लोग आते है |






इस मंदिर को देखने का शाम के वक्त कुछ अलग ही मजा है | शाम के वक्त सारा मंदिर रंग बे रंगी रोशनी से झगमघा उठता है |हररोज 108 गाय के दूध से अभिषेक किया जाता है और संतो नर्मदा के जल से भी अभिषेक करते है |यह अभिषेक किये हुए दूध से छाछ बनवाकर गरीब लोगो में बाटते है |आरती के समय शाम को हररोज भगवान् स्वामीनारायण को हररोज महा अभिषेक ,महापूजा और हाथीपर नगर यात्रा करवाते है | इनमे भगवान् को तोपों की सलामी दी जाती है और संतो और भक्तो द्वारा भक्तिगीत और भक्तिनृत्य करते करते यात्रा चलती है |हजारो लोग इस यात्रा का आनंद उठाते है और पावन होते है | सच में एक बार यहाँ की मुलाकात जरुर लेनी चाहिए |अब हम आपको यहाँ का विशेष और प्रमुख आकर्षण सहजानंद यूनिवर्स के बारे में बताएँगे |


सहजानंद यूनिवर्स 






लोकेशन : बराबर निलकंठ धाम मंदिर के सामने
स्थापना : 2015
कुल जगह : 24 एकर
प्रवेश : बड़ो के लिए : 130/- रु
बच्चोके लिए प्रवेश : 70/- रु  ,
4 वर्ष से निचे के बच्चो के लिए : मुफ्त
फोटोग्राफी : हा
प्रवेश के लिए  समय : 11:00 बजे से 8:00 बजे तक
मुलाकात के लिए जरुरी समय : 3 से 4 घंटे
सहजानंद यूनिवर्स फोन नं :  (+91) 8000000396




सहजानंद यूनिवर्स जो नीलकंठधाम का मुख्य आकर्षण और गुजरात भर मै मशहूर है और लोगो के ह्रदय में एक नया तीर्थधाम बन गया है |सहजानंद यूनिवर्स एक भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करती हुई कायमी प्रदशर्नी है जो पुरे 24 एकर में फैला हुआ है | सहजानंद यूनिवर्स को देखने के लिए आपको 3 से 4 घंटे का समय निकालना पड़ेगा | सहजानंद युनिवर्ष का मुख्य प्रवेशद्वार बहुत ही आह्लादक है |सहजानंद युनिवर्ष के मुख्य आकर्षणों में नीलकंठ ह्रदयकमल,151 फिट बड़ी भगवान् स्वामीनारायण की मूर्ति,प्राकृतिक पर्वतो के बिच बसा हुआ 1100 मुर्तिया जिनमे रामायण -महाभारत के धार्मिक प्रसंग ,हिन्दू भगवान् ,धार्मिक प्ररेक प्रसंग,राम ,श्याम ,शिव ,व्यसन मुक्ति जैसी धार्मिक और भारतीय संस्कृति को जिवंत रखने का प्रयास किया गया है | अन्य आकर्षणों में नेचरल पार्क,अध्यात्मिक प्रदर्शनी,मिरर हाउस ,नौका विहार ,मल्टीमिडिया शो, अम्युसम पार्क ,चेंज ऑफ़ लाइफ सिनेमाघर, थ्री डी लाइट एंड साउंड शो , होरर हाउस ,टनल ऑफ़ यमपूरी ,फ्लावर क्लोक,आर्ट गेलेरी ,और बहुत ही कुदरती सौन्दर्य समावेश होता है | 

सहजानंद यूनिवर्स में अल्पाहार और खाने के लिए भी जगह जगह पर स्टोल की भी व्यवस्था की गई है | पानी की भी बहुत ही अच्छी व्यवस्था की गई है |एक बार जरुर यहाँ की मुलाकात ले| पोइचा के सामने किनारे करनाली में भगवान् कुबेर भंडारी का बहुत ही बड़ा मंदिर है ,जहा हर अमावश्या के दिन भरी श्रद्धालुओ की भीड़ रहती है |आप वहा भी नौका में बैठकर जा शकते है |जय स्वमिनारायण |


नीलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स के कुछ फोटोग्राफ 











नीलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर और सहजानंद यूनिवर्स का गूगल मेप 





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