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श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी जीवन सफ़र

अटल बिहारी बाजपेयी ही एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला। वह भारत के सबसे सम्माननीय और प्रेरक राजनीतिज्ञों में से एक रहे। वाजपेयी ने कई विभिन्न परिषदों और संगठनों के सदस्य के तौर पर भी अपनी सेवाएं दीं। वाजपेयी एक प्रभावशाली कवि और प्रखर वक्ता थे।श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत माता के एक ऐसे सपूत हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता से पूर्व और पश्चात भी अपना जीवन देश और देशवासियों के उत्थान एवं कल्याण हेतु जीया तथा जिनकी वाणी से असाधारण शब्दों को सुनकर आम जन उल्लासित होते रहे और जिनके कार्यों से देश का मस्तक ऊंचा हुआ ।


वास्तविक नाम : अटल बिहारी वाजपेयी
उपनाम : अटल जी
व्यवसाय : भारतीय राजनेता 
जन्मतिथि : 25 दिसंबर 1924
जन्मस्थान : ग्वालियर राज्य, ब्रिटिश भारत (अब, मध्य प्रदेश, भारत)
पिता :  कृष्ण बिहारी वाजपेयी (कवि और स्कूल मास्टर)
माता : कृष्णा देवी
भाई: अवध बिहारी वाजपेयी, प्रेम बिहारी वाजपेयी, सुदा बिहारी वाजपेयी
बहन:  उर्मिला मिश्रा, विमला मिश्रा, कमला देवी
शैक्षिक योग्यता  : 

ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से हिंदी
अंग्रेजी और संस्कृत के साथ स्नातक दयानंद एंग्लो-वैदिक कॉलेज,
कानपुर से राजनीति विज्ञान में एम.ए (M.A)

पुरस्कार    : 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
                   1994 में सर्व श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार दिया गया।
                   2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 
मृत्यु: अगस्त 16, 2018 (उम्र 93), एम्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली, भारत 

प्रारंभिक जीवन 

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ। वह अपने पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता कृष्णा देवी के सात बच्चों में से एक थे। उनके पिता एक विद्वान और स्कूल शिक्षक थे।इन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज - जो अब लक्ष्मीबाई कॉलेज कहलाता है - में तथा कानपुर उ. प्र. के डी. ए. वी. कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की और राजनीति विज्ञान में एम. ए.की उपाधि प्राप्त की. सन् 1993 मे कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा दर्शन शास्त्र में पी.एच डी की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए.

वाजपेयी की राजनैतिक यात्रा

वाजपेयी की राजनैतिक यात्रा की शुरुआत एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई। 

1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के कारण वह अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर लिए गए। इसी समय उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई, जो भारतीय जनसंघ यानी बी.जे.एस. के नेता थे। उनके राजनैतिक एजेंडे में वाजपेयी ने सहयोग किया। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मुकर्जी की जल्द ही मृत्यु हो गई और बी.जे.एस. की कमान वाजपेयी ने संभाली और इस संगठन के विचारों और एजेंडे को आगे बढ़ाया। 

सन 1954 में वह बलरामपुर सीट से संसद सदस्य निर्वाचित हुए। छोटी उम्र के बावजूद वाजपेयी के विस्तृत नजरिए और जानकारी ने उन्हें राजनीति जगत में सम्मान और स्थान दिलाने में मदद की। 

वर्ष 1957 में, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार (दूसरे आम चुनावों में) अटल जी को लोकसभा के लिए चुना गया था।

सन 1977 में जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी, वाजपेयी को विदेश मंत्री बनाया गया। दो वर्ष बाद उन्होंने चीन के साथ संबंधों पर चर्चा करने के लिए वहां की यात्रा की। भारत पाकिस्तान के 1971 के युद्ध के कारण प्रभावित हुए भारत-पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते को सुधारने के लिए उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा कर नई पहल की। जब जनता पार्टी ने आर.एस.एस. पर हमला किया, तब उन्होंने 1979 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 

सन 1980 में भारतीय जनता पार्टी की नींव रखने की पहल उनके व बीजेएस तथा आरएसएस से आए लालकृष्ण आडवाणी और भैरो सिंह शेखावत जैसे साथियों ने रखी। स्थापना के बाद पहले पांच साल वाजपेयी इस पार्टी के अध्यक्ष रहे।

सन 1992 में देश की उन्नति में योगदान के लिए पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया।

सन 1996 में  पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने।

सन 1998 में  दूसरी बार भी देश के प्रधानमंत्री बने।

सन 1999 में  तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने और दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा संचालित कर इतिहास रचा ।

सन 2005 में  दिसंबर माह में राजनीति से संन्यास ले लिया।

सन 2015 में  देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और उत्कृष्ट सांसद होने के अलावा, अटल बिहारी वाजपेयी एक प्रसिद्ध कवि और सभी राजनीतिक दलों में सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व हैं।

वाजपेयी समस्त जीवन अविवहित रहे। उन्होंने राजकुमारी कौल और बीएन कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को गोद लिया था।

मृत्यु

 

सन 2009 में उन्हे दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता ही गया।  11  जून 2018 को उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था, जहाँ 16 अगस्त 2018 को वे परलोक सिधार गये। 17 अगस्त को उनकी दत्‍तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या मुखाग्नि दी। राजघाट के पास शान्ति वन में स्मृति स्थल में उनकी समाधि बनायी गयी है।
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श्री गणेश मंदिर गणपतपुरा (गणपति पूरा) स्वयंभू गणेश कोठ गाव में है जो अहमदाबाद के नजदीक गुजरात में स्थित है

गणपतपूरा और गणपतिपूरा जो कोठ गाव में गणपतिदादा का भव्य मंदिर बना है |गणपतिपूरा अहमदाबाद से करीबन 62 किमी की दुरी पर धोलका तहसील में बसा है | यहाँ गणपति दादा का अलौकिक मंदिर है |लाखो श्रद्धालु  यहाँ आते है और बापा के दिव्य दर्शन करके पावन होते है |यहाँ हम आपको गणपतिपूरा मंदिर के बारे में कुछ माहिती बताएँगे |



लोकेशन : कोठ गाव, अहमदाबाद से करीबन 62 किमी
स्थापना वर्ष : 2008
संचालित : गणपति महाराज ट्रस्ट
प्रवेश : फ्री
मुख्य आकर्षण : गणपति दादा की आह्लादक मूर्ति ,और मंदिर का मुख्य द्वार
फोटोग्राफी : मंदिर के अन्दर मना
मुलाकात के लिए समय : करीबन 1  घंटा 
मुलाकात के लिए सही समय : हर महीने की संकष्टी चतुर्थी 
मंदिर के उत्सव : गणेश उत्सव क्लिक करे
फोन नंबर : +91-9374003049
नजदीकी रेलवे स्टेशन : अरणेज रेल्वेस्टेशन (6 किमी )
नजदीकी हवाई अड्डा : अहमदाबाद हवाई अड्डा (67 किमी )


अहमदाबाद से करीबन 62 किमी की दुरी पर धोलका तहसील में बसा हुआ एक छोटा सा गाव जिसका नाम है कोठ आज स्वयंभू गणपति दादा के प्रगट्य से सारे भारत में मशहूर हो गया है | कोठ गाव में गणपति का मंदिर है इसी वजे से उसे गणेश पूरा और गणपति पूरा के नाम से जाना जाता है | यहाँ मंदिर में गणपति दादा की 6 फिट की स्वयंभू प्रतिमा के दर्शन होते है | यह प्रतिमा की विशेषता ये है की गणेशजी की सुंड बायनी और की है और एअकदंती प्रतिमा है | यह प्रतिमा पूर्वाभिमुख ,मंदिर के गेट से ही दिखाई देती है | मंदिर का प्रवेश कलात्मक और आकर्षक लाल पत्थरो में से बनाया गया है | गणपति बाप का सिंहाशन सोने में से बनाया गया है |सुबह शाम अलग अलग समय पर आरती और पूजा की जाती है |हर महीने हर महीने की संकष्टी चतुर्थी पर लाखो श्रद्धालु यहाँ बापा का दर्शन करने आते है | इस दिन यहाँ मंदिर ट्रस्ट द्वारा चाय पानी एवं नि:शुल्क भोजन की भी व्यवस्था की जाती है | मंदिर ट्रस्ट द्वारा गणपति बापा के प्रिय मोदक प्रसाद के रूप में दिए जाते है | इस दिन बाप्पा को 6000 किलो बूंदी के लाडू और 1500 किलो चूरमे के लाडू का भोग चढाया जाता है | मंदिर के गेट के बहार यहाँ की मशहुर केले के वेफर काफी लोग खरीद कर घर ले जाते है |

गणेश मंदिर गणपति पूरा का इतिहास 

प्राचीनकाल में कहा गया है की यहाँ पर विक्रम संवत 933 अषाढ़ महीने के वद पक्ष के चोथे दिन (अषाढ 4 ) रविवार का दिन था तब हाथेल की जमीं का केरडा के जाले के खोदकाम के वक्त गणेशजी की प्रतिमा पाव में सोने के पायल ,कान में कुंडल,माथे पे मुकुट ,और समग्र आभूषण के साथ प्रगट हुई थी |यह प्रतिमा को ले जाने के लिए आसपास के गाव वालो में झगडा हो गया | उसके बाद चमत्कार हुआ ,प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखा गया फिर वो गाड़ी बिना बैल के अपने आप चलने लगी और गणपतिपूरा के ऊँचे भाग पर जाकर खड़ी रही | यह जगह दुदा भरवाड और गोकल की शक्तिमता की स्थापना की गई थी वहा जाकर प्रतिमा अपने आप नीचे आ गई |तबसे यहाँ का नाम गणपतिपूरा पड गया ,और यहाँ आज बड़ा सा गणपति बापा का मंदिर बना हुआ है |हर महीने की संकष्टी चतुर्थी पर यहाँ करीबन दो से ढाई लाख श्रद्धालु यहाँ आते है और लाखो रुपये का दान करते है |हर एक की मनोकामना बाप्पा पूरी करता है | गणपतपूरा के सामने ही अरणेज में मा बुटभवानी का भी मंदिर है , जो इनका भी दर्शन करके जाना |

गणेश मंदिर गणपति पूरा आरती एवं दर्शन के समय 

दर्शन के लिए समय : 5:30 AM to 8:30 PM
आरती का समय : सुबह 5:30  बजे , शाम :6 :00 बजे 
संकष्टी चतुर्थी दर्शन समय : सुबह 5:30  बजे से रात के  चन्द्रोदय तक 
संकष्टी चतुर्थी आरती समय : सुबह 5:30  बजे , शाम :6 :00 बजे , चन्द्रोदय  बाद 



 कैसे पहुचे गणेश मंदिर गणपतिपूरा (कोठ )


हवाई जहाज के जरीए :  यहाँ से नजदीकी हवाई अड्डा अहमदाबाद हवाई अड्डा पड़ता है जो करीबन 67 कीमी की दुरी पर है | वहा से आप टेक्सी और बस के जरिये यहाँ पहुच शकते है |

रेलवे के जरीए : यहाँ से नजदीकी रेलवे स्टेशन अरणेज स्टेशन करीबन 6 किमी की दुरी पर है |

बस के जरीए : अहमदाबाद से बहुत से सरकारी बसे और टेक्सी मिल शकती है और संकष्टी चतुर्थी के दिन भी बहुत सारी बस का इंतजाम किया जाता है |

गणपति मंदिर गणपतपुरा गूगल मेप

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भारत देश संपूर्ण परिचय

भारत देश विश्व का सबसे बड़ा लोकशाही देश है ।भारत देश को बिनसांप्रदायिक देश भी है । राजा 'भरत' के नाम से भारत देश का नाम भारत पड़ा । भारत को हिंदुस्तान भी कहा जाता है । यहाँ आपको भारत देश के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गई है , हमें आशा है की आपको वह पसंद आएगा । 


प्राचीन नाम : आर्यावर्त, भरतभूमि , भरतखंड
अर्वाचीन नाम : भारत , इंडिया
भारत की राजधानी :  नई दिल्ली
विस्तार : करीबन ३२.९ लाख चो.किमी
जन संख्या : १ अरब २१ करोड़ (२०१५ )
राज्य : ३१
केंद्र शासित प्रदेश :
कुल जिले : ६४२
कुल गाँव : करीबन ६.४२ लाख
अक्षांशीय विस्तार : ८°४’उत्तरी अक्षांश से ३७ °६’ उत्तरी अक्षांश तक
देशान्तरीय विस्तार : ६८ °७’ पूर्वी देशांतर से ९७°२५’ पूर्वी देशांतर तक
भारत की सीमा : पूर्व में बर्मा ,पश्चिम में पाकिस्तान,उत्तर में हिमालय,दक्षिण में हिद महासागर
पूर्व से पश्चिम विस्तार : २९३३ कि.मी.
उत्तर से दक्षिण विस्तार : ३२१४ कि.मी.
भारत की स्थलीय सीमा कुल लम्बाई : १५२०० कि.मी.
स्वतंत्रता: १५ अगस्त १९४७ ( स्वतंत्रता दिवस )
प्रजासत्ताक (संविधान ): २६ जनवरी ,१९५०
राष्ट्रभाषा : हिंदी
राष्ट्रगीत : जन गण मन अधिनायक ....(रविन्द्रनाथ टागोर )
राष्ट्रद्व्ज: त्रिरंगा (केशरिया ,सफ़ेद ,हरा -बिच में अशोक चक्र )
राष्ट्रप्रतिक : चार शेर (त्रिमूर्ति )
राष्ट्रीय आदर्श शब्द : सत्यमेव जयते
राष्ट्रीय फल : आम
राष्ट्रीय फूल : कमल
राष्ट्रीय खेल : हॉकी
भारत की कुल भाषाएँ : लगभग १९५२



भारत देश के प्रमुख तीर्थ स्थान  




भारत में अनेक तीर्थ स्थान है और वो सरे जहा में मशहूर है ।भरा के प्रमुख तीर्थ स्थानों के बारे में दिशाओ के अनुशार चार विभाग बनते है ,उत्तर ,दक्षिण,पूर्व ,पश्चीम ।निचे सभी के विभागीय नाम है ।

उत्तर भारत : उत्तर भारत में तीर्थ धाम थोड़े कम है ।जिसमे प्रमुख हरिद्वार , ऋषिकेश ,बद्रीनाथ ,केदारनाथ ,कैलाश पर्वत ,हिमालय ,प्रयाग,अमरनाथ बाबा,उज्जैन ,बनारस ,चित्रकूट ,गोकुल,मथुरा,वृन्दावन, ताजमहल  

दक्षिण भारत : दक्षिण भारत में पुराने और  ऐतिहासिक इमारते, तीर्थ स्थान बहुत अच्छी कला का आज भी जग मशहूर है दक्षिण के तीर्थ स्थानों में प्रमुख रामेश्वरम,धनुकोष्ठी ,त्र्यंबक,महाबलीपुरम,हलेबिड ,हसन ,बेलूर,गोमतेश्वर ,मदुराई ,त्रिवेंद्रम ,पद्मनाभ स्वामी मंदिर  का शमाविष्ट होता है ।

पूर्व भारत : पूर्व भारत में प्रमुख जगन्नाथ पूरी ,भुवनेश्वर ,बुद्धगया,खजुराहो  की गणना होती है  ।

पश्चिम भारत : पश्चिम भारत में प्रमुख द्वारका ,सोमनाथ ,पावागढ़ ,डाकोर,अम्बाजी ,नाथद्वारा ,कांकरोली ,केशरियाजी मशहूर ही  ।



भारत देश में सबसे अधिक मशहूर 


तीर्थ स्थल :-धर्मो के अनुसार 



हिन्दू:प्रयाग, काशी ,गया,(तिन यात्राधाम)बद्रीनाथ ,द्वारका ,जगन्नाथपुरी ,रामेश्वर,(चार यात्राधाम ),सोमनाथ,तिरुपति,केदारनाथ,अमरनाथ,द्वादश ज्योतिर्लिंग 
जैन : समेतशिखर (बिहार ), पलिताना (गुजरात),श्रवण ,बेलगोडा ।
बौद्ध : लुन्गिनी देवी (जन्मस्थान )बुद्धगया (बुद्ध पद ),सारनाथ (प्रथम उपदेश ),कुशिनारा (पारी निर्वाण ),कपिलवस्तु ,वैशाली,राजगिरी ,श्रावस्ती  ।
मुस्लिम : अजमेर ,हाजीमंगल,(मलंग गढ़ , जिल्ला : थाना )
शिख : अमृतसर ,आनंदपुर ,पटना ,नादेड (चार तख़्त )
ख्रिस्ती : वैलंगानी, मद्रास के पास मौलापुर (संत टोमसकी समाधी),गोवा का दो जीसस केथेड्रल 
पारसी : उदवाडा 

सबसे बड़ी नदिया : गंगा (सबसे लम्बी नदी -२६५५ किमी ),यमुना ,चम्बल,ब्रह्मपुत्रा ,महि,गोदावरी ,कृष्णा,कावेरी,नर्मदा,तापी ,बियास,सतलज,तुंगभद्रा,गोमती,कोसी,शोण,शरावती ,पूर्णा,रामगंगा ,दामोदर, गंडक  

प्रमुख बन्दरगाह : मुंबई ,मर्मगोवा ,मेंग्लोरम ,कोचीन ,कंडला,कलकत्ता,विशाखाटनम,न्हवाशिवा,पारादीप ,तूतीकोरिन 

अखात : खंभात का अखात ,मनोर अखात,कच्छ अखात 

सरोवर : कुदरती : वुलर,डाल(कश्मीर ),केलेरू (आंध्र प्रदेश),चिलका (उड़ीसा),पुलीकट (तमिलनाडु),ढेबर,पुष्कर,सांभर (राजस्थान),नल सरोवर (गुजरात),ब्रह्म (हरियाणा )
 कृत्रिम सरोवर : गोविंद सागर (भाकरा ),गाँधीसागर( चंबल ),नागार्जुन सागर (कृष्णा ),कृष्ण राजसागर(कवेरी),निझामसागर (गोदावरी),सरदार सरोवर (नर्मदा)

ऊँचे पर्वत : हिमालय ,विन्द्याचल ,अरवल्ली ,सातपुडा, काराकोरम ,पश्चिमघाट, आबू ,गिरनार ,गारो ,खासी, जेतीया,पतकोई,लुसाइ,महादेव,मैकल,पूर्वघाट,श्रेतुंजो । 

हिलस्टेशन : महाबलेश्वर ,माथेरान ,पंचगिनी(महाराष्ट्र),मसुरी,नैनिताल (उत्तर प्रदेश ),कोड़ाइकेनाल,उटाकामल (उटी) (तमिलनाडू ),सिमला ,कुलु-मनाली (हिमाचल प्रदेश),श्री नगर ,गुलमर्ग,पहेलगाव (कश्मीर),शिलोंग (मेघालय),दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल ),आबू (राजस्थान)

बाग बगीचे : निशात बाग ,शालीमार गार्डन (श्रीनगर ),नेशनल पार्क ,हेगिंग गार्डन (मुंबई ),लाल बाग (बेंगलोर ),मुग़ल गार्डन (दिल्ही ),बोटनिकल गार्डन (कलकत्ता),आल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद),वुन्दावन गार्डन (मैसूर),छत्री बाग (इंदोर), पिजोरा बाग ,रोक गार्डन (चंडीगढ़)

भारत के पवित्र मंदिर  


केदरनाथ -उत्तराखंड 
बद्रीनाथ - उत्तराखंड
अमरनाथ -कश्मीर
गाँधी स्मारक -कन्याकुमारी 
सोमनाथ मंदिर - गुजरात 
कमल (लोटस) मंदिर -नई दिल्ही 
काशी विश्वनाथ -वाराणसी 
नंदी मंदिर : कर्नाटक 
बौध मंदिर : गया 
मिनाक्षी मंदिर : मदुराई 
बेलूर मठ -कलकत्ता 
अक्षरधाम -गांधीनगर 
अक्षरधाम -दिल्ही 
साइबाबा मंदिर -शिर्डी 
वैष्णो देवी -जम्मू 
हर की पौड़ी -हरीद्वार 
खजुराहो मंदिर -मध्यप्रदेश 
महाबलीपुरम -तामिलनाडू 
जगन्नाथ मंदिर -पूरी 
गंगोत्री मंदिर -उत्तराखंड 
बिरला मंदिर -नई दिल्ही 
सूर्य मंदिर-कोणार्क 
सारनाथ मंदिर -उत्तरप्रदेश 
भुक्तेश्वर मंदिर -भुवनेश्वर 
शंकराचार्य मंदिर -कश्मीर 
बिरला मंदिर -जयपुर 
रोक मंदिर -तमिलनाडु 
कामाख्या मंदिर -आसाम 
मुक्तिधाम -नाशिक 



भारत की ऐतिहासिक इमारते 


सुवर्ण मंदिर : अमृतसर 
गुरुद्वारा सीस गंज -नई दिल्ही 
दुर्गियाना मंदिर- अमृतसर 
संसद भवन -नई दिल्ही 
केंद्रीय सचिवालय -नई दिल्ही 
जामा मस्जिद -नई दिल्ही 
लाल किल्ला -नई दिल्ही 
गेट वे ऑफ़ इंडिया -मुम्बई 
इंडिया गेट -नई दिल्ही 
जंतर-मंतर-नई दिल्ही 
हवा महल -जयपुर 
ताजमहल -आगरा 
कुतुबमीनार -नई दिल्ही 
गोल्डन ब्रिज -भरूच 
हवरा ब्रिज -कलकत्ता 
विजय स्तंभ -चित्तोड़गढ़ 
चार मीनार -हैदराबाद 
हुमायु मकबरा -नई दिल्ही 
साची स्तूप -मध्यप्रदेश 
राजघाट- दिल्ही  
शांतिवन - दिल्ही 
विजयघाट -दिल्ही 

भारत देश गूगल मेप 



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इंदिरा गांधी जयंती - इंदिरा गाँधी , प्रियदर्शनी गाँधी का परिचय-भारत की प्रथम और एक मात्र महिला वडाप्रधान

इंदिरा गांधी भारत देश की शक्तिशाली प्रथम महिला वडा प्रधान जो  'प्रियदर्शनी' के नाम से जानी जाती है । यहाँ इस पोस्ट में इंदिरा गाँधी जन्म जयंती और इंदिरागाँधी का जीवन परिचय के बारे लिखा गया है , आशा है आपको पसंद आएगा ।




इंदिरा गाँधी जयंती हर साल १९ वि नवम्बर को मनाया जाता है।इस दिन पुरे देश में जगह जगह पर जुलुश निकले जाते है और  प्रार्थना सभा , सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है।श्रंद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है। अनेक शैक्षिक संस्थानों में इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। कांग्रेस मुख्यालय एवं अन्य कार्यालयों में विशेष आयोजन किये जाते हैं। इन्दिरा गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा अर्पित की जाती है।


इंदिरा गाँधी का परिचय 



पूरा नाम : इंदिरा प्रियदर्शनी गाँधी
जन्म दिनाक : १९ नवम्बर , १९१७
जन्म स्थल : इलाहाबाद -उत्तर प्रदेश
पिता का नाम : पंडित जवाहरलाल नेहरु
माता : कमला नहेरु
पति : फ़िरोज़ गाँधी
संतान : राजीव गाँधी , संजय गाँधी
मृत्यु : ३१  अक्टूबर, १९८४ , नई दिल्ली


श्रीमती इंदिरा गाँधी का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में श्रीमंत नहेरु परिवार में हुआ था । श्रीमती इंदिरा गाँधी स्वंत्रत भारत की पहली महिला वाडा प्रधान थे । उनके पिता जवाहरलाल नहेरु स्वतंत्र भारत के पहले वडा प्रधान थे ।बचपन से ही देश प्रेम और राजनैतिक मूल्यों को अपने दिल में रखकर वे अपने पिता जवाहरलाल नेहरू के साथ ही रहते थे और राजनैतिक नीतिओ की भी शिक्षा ली ।कवि श्री रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'प्रियदर्शनी ' नाम दिया था । उनको दुशरे नाम 'इंदु ' और गूंगी गुडिया ' के नाम से भी पहचाने जाते थे ।इंदिरा गाँधी बचपन से ही भारत की स्वतंत्रता के संग्राम में जुड़े हुए थे ।उनके पिता सक्रीय राजकारणी होने के कारण घर में सदा राजनीती का माहोल रहता था , उसी माहोल में इंदिराजी का पालन पोषण हुआ।उन्होंने विश्वभारती विश्वविद्यालय बंगाल, इंग्लैंड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी, शांति निकेतन में अपनी शिक्षा पूर्ण की ।

सन १९४२ में उन्होंने अपने पिता की इच्छा के बिना फ़िरोज़ गाँधी पारशी युवक के साथ शादी की । शादी के बाद संजय गाँधी और राजीव गाँधी दो पुत्रो को जन्मा दिया ।सन १९६४ में पिता जवाहरलाल नहरू के अवसान के बाद कोंग्रेस पक्ष द्वारा राज्यसभा के सभ्य नियुक्त किये ।फिर वे उस समय के वडाप्रधान लालबहादुर शास्त्री की सर्कार में प्रधान बने ।लालबहादुर शास्त्री का सन १९६६ में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु होने से कोंग्रेस पक्ष ने इंदिराज को भारत के वडा प्रधान के रूप में नियुक्ति की ।१० साल तक वे भारत के वडा प्रधान रहे ।फिर वो १९८० में फिर से वो वडा प्रधान बने ।

श्रीमती इंदिरा गांधी कमला नेहरू स्मृति अस्पताल, गांधी स्मारक निधि और कस्तूरबा गांधी स्मृति न्यास जैसे संगठनों और संस्थानों से जुडी हुई थीं। वे स्वराज भवन न्यास की अध्यक्ष थीं। वह बाल सहयोग, बाल भवन बोर्ड और बच्चों के राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ जुड़ीं।श्रीमती गांधी ने इलाहाबाद में कमला नेहरू विद्यालय की स्थापना की थी।वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और पूर्वोत्तर विश्वविद्यालय जैसी कुछ बड़ी संस्थानों के साथ जुडी रहीं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय न्यायालय, 1960-64 में यूनेस्को के भारतीय प्रतिनिधिमंडल, 1960-1964 में यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड और 1962 में राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह संगीत नाटक अकादमी, राष्ट्रीय एकता परिषद, हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान,दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, नेहरू स्मारक संग्रहालय, पुस्तकालय समाज और जवाहर लाल नेहरू स्मृति निधि के साथ जुडी रहीं।

सन १९७५ में आपातकाल १९८४ में सिख दंगा जैसे कई मुद्दो पर इंदिरा गाँधी को भारी विरोध-प्रदर्शन और तीखी आलोचनाए का सामना करना पड़ा था । उसके बावजूद भी इंदिराजी ने १९७१ के युद्ध में विश्व शक्तिओ के सामने न झुकने के नीतिगत और समयानुकूल निर्णय क्षमता से पाकिस्तान को हरा दिया और बांग्लादेश को मुक्ति दिलाकर भारत देश को समग्र विश्व में गौरवपूर्ण क्षण दिलवाया । उस समय उन्हें "भारत रत्न " से सन्मानित किया गया ।

सन १९८० से १९८४ के समय में जब उनका वडाप्रधान काल चल रहा था तब पंजाब के बटवारे के समय स्वर्ण मंदिर पर आंतकवादियो के सामने हिन्दुस्तानी लश्कर के गोलीबार का हुकुम इंदिरा जीने दिया। उसी समय वहा करीबन १००० निर्दोष लोग मरे गए उसमे ४९० जितने सिख युवान मरे गए । इस हमले के प्रतिकार में पाँच महीने के बाद ही ३१ अक्टूबर १९८४ को श्रीमती गाँधी के आवास पर तैनात उनके दो सिक्ख अंगरक्षकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

आखिर में श्रीमती इन्दिरा गांधी एक ऐसी महिला थीं, जो न केवल भारतीय राजनीति पर छाई रहीं बल्कि विश्व राजनीति के क्षितिज पर भी वह विलक्षण प्रभाव छोड़ गईं। उन्हें 'लौह महिला' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। अपनी प्रतिभा और राजनीतिक दृढ़ता के लिए 'विश्वराजनीति' के इतिहास में इन्दिरा गांधी का नाम सदैव याद रखा जायेगा।
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विश्व में पहेचाना जाता है भारत देश अपनी भारतीय संस्कृति के लिए जानिए

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है जो लगभग ५००० हजार वर्ष पुरानी है। विश्व की पहली और महान संस्कृति के रुप में भारतीय संस्कृति को माना जाता है | पुरे विश्व में भारत देश अपनी संस्कृति के लिए पहचाना जाता है | भारतीय संस्कृति को विश्व की सभी संस्कृतियो की जननी कहा जाता है |भारतीय संस्कृति में पहेले धर्मं की संस्कृति को जाना जाता है | भारत देश बिनसांप्रदायिक देश है| इस देश की सबसे बड़ी संस्कृती में ये बात आती है | बिनसांप्रदायिक का अर्थ होता है सभी धर्मं के लोग को रहेने का अधिकार और कोई भी धर्मं अपनाने का अधिकार |भारत देश में हिन्दू,मुस्लिम,शिख,पारशी,इसाई, जैन सभी धर्मो के लोग हिल मिल कर रहेते है और एक दुशरे से कदम से कदम मिलकर चलते है |भारत देश में बड़े बड़े संत महात्मा और रिशिमुनियो, ने हमें धर्मं ग्रन्थ, वेद, उपनिषद, पूरण,श्रीमद भगवद जैस धर्मं ग्रन्थ, और सभी धर्मो के धर्मं ग्रन्थ की बहुत ही बड़ी भेट दी है , जिससे हमें अच्छे और सरल जीवन जीने के तरीके सिख सखते है |

भारत देश पर मुघलो , अंग्रेजो ,राजपूतो जैसे अनेको ने राज किया और उन्होंने ऐसे ऐसे इमारतों और ग्रंथो की रचना की की आधुनिक समय में हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते | उससे पहले कहा जाता है की सतयुग में भगवान ने भी इस भारत देश की धरती पर अवतार लिए है | किसी भी देश की संस्कृति में ऐसी बात नहीं लिखी होती जो भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा है | इस देश में श्रीराम,श्री कृष्ण,संत कबीर,महमद साहेब पयगम्बर, गुरु गोविंद ,शंकर पार्वती ,अल्लाह, प्रभु इशु, जैसे भगवन को पूंजा जाता है | भारत देश सम्राट अशोक, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप,रानी लक्ष्मी बाई,पन्ना धाइ , सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे वीर की भूमि है | स्वामी विवेकानंद ,राज राम मोहनराइ ,महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु, जैसे देश सेवको ने इस देश की संस्कृति को बचाने के लिए अपने प्राण तक दाव पर लगा दिए | 

भारतीय संस्कृति आज भी हमें धर्म का ज्ञान,रीती रिवाजो,जीवन जीने के निजी तरीके,मान सन्मान,त्याग,बलिदान, हिलमिल कर रहना , सत्य , अहिंसा, जरूरत मंदों कि मदद करना जैसे मूल्यों को सिखाती है | आज भी सरे विश्वके लोगो ने भारतीय संस्कृति को अपनाया है |भारतीय संस्कृति में स्त्री को बहुत मन सन्मान दिया जाता है और घर की इज्जत माना जाता है | हिन्दू धर्म में गृह लक्ष्मी माना जाता है | भारत में दिन सूर्य नमस्कार के साथ शुरु होता है | इसमें लोग सूर्य को जल चढ़ाते हैं और मंत्र पढ़कर प्रार्थना करते हैं | भारतीय लोग प्रकृति की पूजा करते हैं और यह इस संस्कृति की अनूठी बात है| हिंदू धर्म में पेड़ों और जानवरों को भगवान की तरह पूजा जाता है | लोग भगवान में विश्वास रखते हैं और कई त्यौहारों पर उपवास रखते हैं| वे सुबह का ताज़ा खाना गाय को और रात का आखिरी खाना कुत्ते को देते हैं | दुनिया में कहीं भी इस तरह की उदारता नहीं देखी जाती |


हमारे राष्ट्र की ये महान संस्कृति है कि हम बहुत खुशी के साथ अपने घर आये मेहमानों की सेवा करते है क्योंकि मेहमान भगवान का रुप होता है इसी वजह से भारत में “अतिथि देवो भव:” का कथन बेहद प्रसिद्ध है| हमारी संस्कृति की मूल जड़ इंसानियत और आध्यात्मिक कार्य है| भारत देश के लोग अपने उत्सव जैसे की दिपावली , होली,रक्षाबंधन, नवरात्री,दशहरा,जन्माष्टमी,नाताल, ईद-ए-मिलाद , पतेती, बैसाखी जैसे त्यौहार धामधूम से मनाये जाते है , और भारतीय संस्कृति का डंका सारे विश्व में बजाते है | भारत देश के लोक मेले तो भारतीय संस्कृति का एक अहम् हिस्सा है |भारतीय शास्त्रीय नृत्य, जैसे भरतनाट्यम, कथकली, कत्थक, मणिपुरी, ओडिसी और कुचिपुड़ी मुख्य तौर पर नाट्य शास्त्र, पुराण और शास्त्रीय साहित्य और रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों के संकेतों का पालन करना भारतीय संस्कृति का एक आयना सारे विश्व के सामने है |भरता के कारीगरो की कला कारीगरी के उदहारण के रूप में ताजमहल, लाल किल्ला, कुतुबमीनार ,सोमनाथ मंदिर,पद्मनाभ स्वामी मंदिर,चर्च ,गिरजाघर जैसी कलात्मक इमारते पुराने समय से भारतीय संस्कृति का प्रचार कई सालो से पुरे विश्व में कर रहे है और एक अद्भुत कलात्मक कारीगरी का जीता जागता उदहारण है |

भारतीय संस्कृति हमें बहुत ही सिकहती है | आज नयी पीढ़िया हमारी संस्कृति को भुलाकर दुशरे देश की संस्कृत अपनाने जा रही है पर सचमे भारतीय संस्कृति को बहार के देश और लोग भी अपना रहे है , तो हम भारतीय है , तो अपनी संस्कृति को कभी भूलना नहीं चाहए ,बल्कि सरे विश्व में इसका प्रचार करना चाहए |
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